Tag Archives: Nizar Qabbani

कविता : हम का पढ़उबै (निजार कब्बानी)

कविता : हम का  पढ़उबै  (निजार कब्बानी)

हम का पढ़उबै 
तुहैं प्रेम-पोथी !/? 
        मछरिया क तैरै 
        भला के सिखाइस 
        चिरैया क बिचरै 
        भला के बताइस. 
हम का पढ़उबै 
तुहैं प्रेम-पोथी !/? 
        अपनेन भरोसे 
        पनिया म लहरौ 
        अपनेन भरोसे 
        अकसवा म छहरौ. 
हम का पढ़उबै 
तुहैं प्रेम-पोथी !/? 
        किताबै सिखाइन 
        कब ढाई-आखर? 
        तारीखी आसिक 
        भये  हैं निरच्छर. 
हम का पढ़उबै 
तुहैं प्रेम-पोथी !/?

[ मूल : निजार कब्बानी केरि  कविता / अनुवाद : अमरेन्द्र ]