डॉ. प्रदीप शुक्ल कय कबिता.

प्रदीप शुक्ल केरी कबिताई से आज आप लोगन क रूबरू कराउब। प्रदीप शुक्ल कय अउरिउ कबितन क पढ़ेन, औ पढ़े के बादि ई समझ मा आवा कि सामाजिक-राजनीतिक सोसन मा पिसत मनई क हिगारब(यानी सामने लाउब) इन कबितन कय मूल संबेदना आय। हजार जखम खाये मनई के साथे जवन आवाज निकरत हय ऊ तनिका आँकर हुयिन जाति हय, औ ऊ चुभाऊ ब्यंग कय सकलि लइ लियत हय। इनकी कबितन मा भासा एतनी सरल अउर समझय मा आसानि अहय कि अलग से कौनौ मेहनत नाहीं करय क परत। यहीताईं पढ़यके साथे-साथे कबिता से जुड़ाव बना रहत हय। हियाँ हम आपनि पसंद कय चारि कबितन क रखत अहन। कबितन क चुनत के हमार ई कोसिस रही कि अलग-अलग मिजाज केरी कबितन क रखी। : संपादक
_______________________________________________________


देसप्रेमु का पाठु फलाने 

समझाईति है तुमका, ना
एतना उत्पातु करौ
देसप्रेमु का पाठु फलाने
फिर ते यादि करौ

ऊपर ते सब जय जय ब्वालैं
अन्दर खूनु पियैं
अईसन मा ई भारत माता
कब तक भला जियैं
ई च्वारन का मारौ पहिले
ताल ठोंकि सम्भरौ

‘टुकड़ा टुकड़ा करिबे यहिके’
जो ब्वालै यहु नारा
नटई ते तुम पकरौ वहिका
दई देव देसु निकारा
लेकिन बात सुनौ अउरिनु की
थ्वारा धीरु धरौ

बेमतलब ना रागु अलापौ
देसप्रेमु का भइय्या
रामदीन द्याखौ भूखा है
भूखी वहिकी गईय्या
रुपिया चढ़ा जाय फ़ुनगी
पहिले वहिका पकरौ

एतना बड़ा देसु, दुई नारन
ते यहु टूटि न जाई
का चाहति हौ, देस भक्ति
हम माथे पर लिखवाई?
खुलि जाई जो यह जबान
ना पईहौ अपन घरौ

समझाईति है तुमका ना
एतना उत्पातु करौ
देसप्रेमु का पाठु फलाने
फिर ते यादि करौ.
(19.02.2016)


घर घर यहै कहानी 

सड़क किनारे बनी दुकानें
ख्यात मरैं बिनु पानी
चले जाव गाँवन मा भईय्या
घर घर यहै कहानी

उलरे उलरे
फिरैं मुसद्दी
अंट शंट गोहरावैं
आधा बिगहा खेतु बेंचि कै
दारू ते मुंहु ध्वावैं
लरिका करै मजूरी घर मा
कढ़िलि रहीं जगरानी
चले जाव गाँवन मा भईय्या
घर घर यहै कहानी

जी जमीन का
बप्पा गोड़िनि,
दादा औ परदादा
जहिमा पानी कम, पुरिखन का
मिला पसीना जादा
बंजर होईगै धरती वहि पर
जाय न कुतिया कानी
चले जाव गाँवन मा भईय्या
घर घर यहै कहानी

सिटी बनी स्मार्ट
हुआँ पर 
करिहैं चौकीदारी
नंबर वन के काश्तकार जो
अब तक रहैं मुरारी
कालोनी के पीछे डरिहैं
आपनि छप्पर छानी
चले जाव गाँवन मा भईय्या
घर घर यहै कहानी.
(29.01.2016)


चुप हैं राम दुलारे

झाँखर बारे
तपता तापैं
मजमा लाग दुआरे
बहस होय रही संविधान पर
चुप हैं राम दुलारे

सोचि रहे हैं
संविधान मा
भला लिखा का होई
यहु काहे नहिं लिखा
देस मा भूखा कोउ न सोई
लिखौ होई तौ
छुपा लिहिन
होईहैं उई मिलिकै सारे

पईसा, दारू
जो बाँटी
फिरि वहु पाई परधानी
पाँचि साल मा वहिके घर मा
लछमी भरिहैं पानी
संविधान मा
यहौ लिखा का
भईया राम पियारे

संविधान के
‘ हम ‘ पर काफी
जोर दिहिनि हैं कक्का
देसु मगर चेलवन की बातन
ते है हक्का बक्का
भरी दुपहरी
हमका लागति
अईहैं बदरा कारे

बहस होय रही संविधान पर
चुप हैं राम दुलारे.
(28.11.2015)


नई बहुरिया दावत ठाने है

काकी बइठे जिरजिराँय कोउ
बात न माने है
नए साल मा नई बहुरिया
दावत ठाने है

काकी खटिया पर
बरोठ मा
खाँसे जाती हैं
बीच बीच मा काका के
ऊपर चिल्लाती हैं
काका द्याखैं टुकुर टुकुर
बैठे सिरहाने हैं
नए साल मा नई बहुरिया
दावत ठाने है

‘ पानी – पानी ‘ के
ऊपर बस
नाचि रहे सारे
बहुत देर ते पानी माँगति
काका बेचारे
अधखाई थाली खटिया
रक्खी पैताने है
नए साल मा नई बहुरिया
दावत ठाने है

बड़की भौजी
डारे घूँघट
नाचि रहीं जमके
नई बहुरिया पैंट पहिन
पूरे आँगन थिरके
खाँसि खखारति ससुरौ का
वह ना पहिचाने है
नए साल मा नई बहुरिया
दावत ठाने है
(31-12-2014)

10178123_793805877304865_5314846030965715777_nडॉ. प्रदीप शुक्ल
जन्म – 29 जून, 1967 को लखनऊ जिले के छोटे से गांव भौकापुर के एक गरीब किसान परिवार में.
शिक्षा – प्रारम्भिक शिक्षा गांव में ही, बी.एससी. कान्यकुब्ज कॉलेज, लखनऊ. एम बी बी एस, एम डी – बालरोग ( स्वर्ण पदक ) – किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज, लखनऊ
वर्तमान में लखनऊ में “ केवल बच्चों के लिए एक हॉस्पिटल “ जहां पर चौबीस घंटे बीमार बच्चों की देखभाल के लिए उपलब्ध, उसी से कुछ समय चुरा कर कविता लिखने का प्रयास.
प्रकाशित रचनाएँ –
1. संयुक्त काव्य संग्रह –
1. नवगीत का लोकधर्मी सौन्दर्यबोध
2. वीथिका
3. पारिजात
4. अनुभूति के इन्द्रधनुष ( सभी गीत, नवगीत, बालगीत )
2. विभिन्न पत्र, पत्रिकाओं, वेब पत्रिकाओं में गीत, नवगीत, बालगीत, कुण्डलिया, कह–मुकरी आदि विधाओं में रचनाएं प्रकाशित.
सम्पर्क:
गंगा चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल
N. H. – 1, सेक्टर – डी, LDA कॉलोनी, कानपुर रोड, लखनऊ – 226012
मोबाइल – 09415029713
E – Mail – drpradeepkshukla@gmail.com

3 responses to “डॉ. प्रदीप शुक्ल कय कबिता.

  1. प्रदीप की कविताएँ चमत्कृत करती हैं।

  2. परदीप भाई कै कबिताई बहुतै नीक हवै।

  3. डॉ. प्रदीप शुक्ल

    धन्निबादु संतोष भईय्या

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s