कविता : ‘अवधी’ (केशव तिवारी)

‘अवधी’ बिसय पै ई कविता केसव जी बहुत पहिलेन ई-मेल पै भेजे रहे। कुछ व्यस्तता के चलते यहिका अबहीं ले पोस्ट नाय कै सका रहेन। ई कविता खड़ीबोली-हिन्दी मा है। यू कविता आप सबके सामने हाजिर है। (संपादक)

कविता : अवधी

यह पहली बार मेरी जुबान पर
माई के दूध की तरह आयी है।
इसके आसपास मंडराती है मेरी संवेदना
यह वह बोली है जिसमें सबसे पहले मैंने किसी से कहा
कि मैं तुम्हे प्यार करता हूँ।
इसके प्राण बजते हैं आल्हा, नकटा और चैती में
तो देखते ही बनता है इसका ओज और ठसक
जायसी तुलसी त्रिलोचन
की बानी है यह
यह उनकी है जिनका सुख दुख सना है इसमें
धधक रही है जिसकी छाती
कोहार के आवां की तरह
जिसमें पक रहे हैं यहां की माटी के
कच्चे बर्तन कल के लिए।
__केशव तिवारी

प्रतापगढ़-अवध से तालुक रखै वाले केसव तिवारी खड़ीबोली हिन्दी कै कवि हैं। यै अपने बारेम्‌ फेसबुक-प्रोफाइल मा लिखे अहैं – ‘I am a student of Marxism and a poet’. वर्तमान मा बांदा जिला (उ.प्र.) मा रहत अहैं। इनसे आप www.facebook.com/keshav.tiwari1 पै संपर्क कै सकत हैं।

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