‘अवधी : कल, आज और कल’ कार्यक्रम कै चर्चा, अखबारी कतरन मा..!

२९ तारीख २०१२ क लखनऊ सोसायटी के वारी से ‘अवधी : कल, आज अउर कल’ बिसय पै सेमिनार राखा गा रहा। यहि कार्यक्रम कै बिस्तार मा रिपोट बनावै कै कोसिस मा हन लेकिन वहिके पहिले अखबारन मा छपी रिपोटन के माध्यम से यहिकै झलक आपके सामने रखि दीन चाहित है। हाजिर है अखबारी कतरन के जरिये यहि कार्यक्रम कै ब्योरा: 

३० जनवरी, २०१२ क ‘हिन्दुस्तान’ अखबार मा:

३० जनवरी २०१२ क ‘दैनिक जागरण’ अखबार मा:

३० जनवरी २०१२ क अमर उजाला मा:


३० जनवरी २०१२ क ‘राष्ट्रीय सहारा’ अखबार मा:


2 responses to “‘अवधी : कल, आज और कल’ कार्यक्रम कै चर्चा, अखबारी कतरन मा..!

  1. अवधी का क्यार वहै हाल अहै कि खइहैं मुरब्बा बतइहैं बरफी। ई गोष्ठी जौन पंचै करावा, ऊ वइसे तो बधाई के पात्र अहैं लेकिन अवध म अवधी का दिया बाती तो तबहूं जलि ही रहा अहै। ई पंचन क कहौ देस के ऊई सहरन म अइस कार्यक्रम करैं जेहिते हुअन जा बसै लोग अपनी मिट्टी त फिरि ते जुड़ि सकैं। बंबई म कुछ मदद वदद जरूरत परै तो बताएओ।

    • आज जरूरत है कि जौन तबका दिनौ-रात अवधी मा जियत है वहिके भीतर अवधी क लैके ‘पहिचान’ कै पुख्ता बोध पैदा हुवै। बाकी कोनैठे मा साहित्य तौ संस्किरतौ क्यार लिखै जात अहै, बात एतनिन नाही है! अब जरूरत है कि गाँव-सहर के बीच अवधी लहर सेतु बनाय दियय। आप पधारिन, आभारी हन्‌।

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