आपन लखनऊ नगरिया..!

   प्रो. कमला श्रीवास्तव केर यू रचना चंदर भइया के सौजन्य से हमैं मिली। लखनऊ पै लिखी यहि कविता क पढ़ा जाय: 

कविता:  आपन लखनऊ नगरिया..! 

गोमती नदी कै किनरिया आपन लखनऊ नगरिया ।

लखन जी की होय सहरिया आपन लखनऊ नगरिया ॥

दूर दूर से लेखक आवैँ, लखनऊ सहर कै रौनक बढ़ावैँ ,

खावैँ मलाई के गिलौरियाँ, आपन लखनऊ नगरिया ॥

बाग बनारसी, मंजिल छतर कै, सभी दरवज्जा औ बाड़ा इमाम कै,

भूल्यो न भूल भुलैय्या, आपन लखनऊ नगरिया ॥

जरदोजी अरु कढ़ाई चिकन कै, राजधानी निधि राजभवन कै,

विधान भवन कै महलीया, आपन लखनऊ नगरिया ॥

कथक ठुमरी गजल गायकी, मौसिकी कै गजब नायकी,

‘सामे अवध’ कै बहरिया, आपन लखनऊ नगरिया ॥

बहेर कबूतर पतंग पेँचबाजी, ये काटा वो काटा पेँच लड़ाजी,

इक्का ताँगा दौड़े सड़किया, आपन लखनऊ नगरिया ॥

खान पान कै लज्जत होय लाजवाब,

रेवड़ी औ मक्खन मलइया, आपन लखनऊ नगरिया ॥

लखनऊ सहर कै सान अनोखी, अदब, तहजीब कै बात होय चोखी।

हम होय लखनऊ कै बसिया, आपन लखनऊ नगरिया ॥

— प्रो.कमला श्रीवास्तव
दै.जागरण लखनऊ 4 दिस.2011 ‘मेरा शहर मेरा गीत’ से .. 

नोट: तरे से दुसरे बंद मा लय औ छंद-विधान टूटा अहै..!    

~सादर/अमरेन्द्रआवधिया

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