अन्ना हजारे..जनता कै अदालत..‘जियौ बहादुर खद्दरधारी’(रफीक शादानी)..

हम चुनाव लड़ब तौ हारि जाब। जमानतौ जब्त होइ जाये। आज लोगै १०० रुपया, सराब कै बोतल, साड़ी अउर आन-आन समान लैके मतदान करत अहैं।
जौन मनई आज तक मुखियौ कै चुनाव नाय जीति सका, ऊ यहि बात कै सर्टिफिकेट दे कि फलाने बेइमान हैं या इमानदार? .. चुनाव लड़ौ, जनता के बीच से, फिर कुछ बोलौ, जनता से बड़ी कौनौ अदालत नाय।
~ अन्ना हजारे के ताईं नेता तारिक 
अनवर कै समझाइस
(नीचे यू-टुबहे पीस मा सुना जाय सकत है।)
     अन्ना हजारे बेसक चुनाव प्रक्रिया से जुड़ा नाहीं हैं, मुला भ्रस्टाचार के खिलाफ आवाज उठावै कै हक उन्हैं पूरा है। जनता के अदालत कै बात केतना सही मानी जाय, जब यही अदालत जाने केतना भ्रस्टाचारिन का मुसलसल जितावत रहत है, ई वही अदालत है जेहिका निरच्छर अउर सोच-बिहीन राखि के सदियन से मलाई काटी जाति अहै। यही मलाई मारू तबका कै देन है कि लोगै ईमान की तरह आपन वोटौ बेंचत अहैं, जेहकै सीधी सीधी बात अन्ना जी किहिन हैं। यहि स्थिति मा खद्दरधारी नेतन की जमात से अलग कै केहू नेतन के भ्रस्टाचार पै अंगुरी देखाये तौ इन नेतन का मिरचा लगबै करे, जेहका तारिक अनवर की तिलमिलाहट मा देखा जाय सकत है। ई देस/संविधान/संसद/बिधानसभा कै बदकिस्मती कही जाये कि यही जनता केरी अदालत से जाने केतना खूनी/कतली/बाहुबली/ठेलुहै सफलता के साथ चुनाव जीतत हैं, अपने हथकंडन के चलते। यहिलिये यहि जनता के अदालत कै सीमा है।

     समय अस है कि भ्रस्टाचार संस्कृति कै हिस्सा बनत जात है। दनादन बिकीलीक्स ! लोकतंत्र कै चौथा खम्भा कहावै वाले मीडिया कै धोखेदार चेहरा ! पढ़े – लिखे बुद्धिजीविन तक मा गहरे पैठा स्वारथ ! न केवल राजनीतिक बल्कि अकादमिकौ संस्थन मा ब्यापा परिवार-वाद ! उसूल पै जियय वाला परेसान और मखौल कै हिस्सा भर ! नाहीं समझ मा आवत कि आपन के अउर परावा के ! स्विस बैंक कै नजारा अलगै कहत है कि देसी लोगन से बड़े लुटेरे तौ बिदेसिउ नाय रहे ! यहि मौके पै कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एच. डी. कुमारस्वामी कै कहब काबिले-गौर है कि “ आज के समय मा अगर महत्मा गाँधिउ जीबित होते तौ या तौ भ्रस्टाचार के जरिये बैंक मा पैसा यकट्ठा करते या फिर राजनीति छोड़ देते।” ऐसे समय मा  अन्ना हजारे कै सबसे बड़ी सफलता ई है कि जहाँ सगरौ कूप मा भाँग परी है, वै कम-से-कम भ्रस्टाचार जैसे मुद्दे पै लोगन का सोचै के तरफ प्रेरित तौ करत अहैं, जन लोकपाल बिल कौनौ फाइनल फतह न आय। ई तौ यक्कै डग है, खामी यहू मा है, मुक भाँग-चेतना वाले माहौल से ई कुनमुनाहट लाख गुना भले अहै!!

     नेतन के चरित पै रफीक सादानी कै ई कबिता ‘ जियौ बहादुर खद्दरधारी ’ सादानी जी के आवाज मा हाजिर है:


     
     चलत चलत यहि यू-टुबहे पीस का देखै कै वकालत करब। यहसे काफी बातैं किलियर होइहैं:

सादर;
अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी

9 responses to “अन्ना हजारे..जनता कै अदालत..‘जियौ बहादुर खद्दरधारी’(रफीक शादानी)..

  1. सुखा या सेलाब जो आवे ….घर वाली आँगन माँ गावे …मंगल भवन अमंगल हारी…..वाह …बहुत खूब कही है !!!!!!!!!!!वाह गज़ब का कटाक्ष किया है ….उस प्रदेश का जहां अक्सर ये होता है !!!!!!!!!!!!!!!वाह बहुत खूब !!!!!!!!!!nirmal paneri

  2. jor ka jhatka jor se
    wah sriman
    netaao ke muh pe jabardast tamacha…
    Bahut badhiya


  3. मूड़ खुजावैं बाल उचारि
    भयभीत हँवैं भ्रष्टाचारी
    मँगल भवन अमँगल हारी
    अन्ना पड़िगे इनपै भारी
    जय हो !

  4. यह तो बचपन से बुजुर्गों के मुह से सुनती आ रही हूँ के “जेईसी बहय बयार पीठ तब तैएसी कीजै” परन्तु आज उस प्रभावशाली व्यक्तित्व को नमन है जिसने हवाओ के रुख को बदल दिया है…………..

  5. जियौ बहादुर खद्दर धारी!

    असिल सवाल बा कि के बेहतर जिये – खद्दरधारी कि भगवाधारी।

  6. बहुत अच्छा लगा यह कविता सुनकर!🙂

  7. सैदानी जी के बारे में बतकही बहुत कीन्ह मुला पहिली बार उनकर जबर ओजस्वी कंठ से कबिता सुनेन। बड़ जिगरा वाला कवि। भइया बहुत धन्यवाद।

  8. Shadani ji ki is rachana men ek-ek shabd desh men vyapt bhrashtachaar par tikha kataksh hai. Shadani ji ko Naman.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s