सबका जलचढ़ी ( शिवरात्रि ) केरि सुभकामना ..

मोहारे के सिवाले पै माई..
सिव द्रोही मम दास कहावा।
सो नर सपनेहुँ मोहि न पावा॥
सैव-बैसनौ के बीचे रारि अपनी आँखी अपने इलाका मा नाहीं देखेन। होइ सकत है कि कौनौ समय रहत रही हुवै, तौ तुलसी बाबा यक दुसरे कै अस मेल करायिन कि रामै कहत हैं – सिउ निन्दक हमैं सपनौ मा नाहीं पाय सकत, भले अपने का हमार दास कहावत हुवै। राम के इलाके मा सिव कै खूब पुजैती है। लोगै यहौ कहत मिलि जैहैं – ‘देवन मैहाँ संकर बाटे / नदियन मैहाँ गंगा।’ गाँउ मा हर घर मा तुलसी क्यार बिरवा मिले अउर वहिके तरे छोटे-छोटे पथरन के रूप मा संकर जी मिलिहैं, यतने सस्ते मा भला अउर देउता कहाँJ
  गाँउ मा जलचढ़ी आवै के पहिलेन औरतै यक-दुसरे से पूछै लागति हैं – ’जलचढ़ी कहिया?’। जब ई दिन आइ जात है तौ भिनसारेन से तैयारी चालू होइ जात है। सुकर है कि यहि दिन कुछ खिचरी के बादौ न नहाय वाले जड़है नहाय तौ लियत हैंJ पूजा-अरचन कै समान यकट्ठा कीन जात है। संकर जी के देउथाने पै गाँउ भै जल चढ़ावत है, यही ताईं साइद जलचढ़ी बोलत हैं। संझलौके से सिउ-पूजा चालू रहति है – जथा सकती, तथा भकती। लोगै जागत हैं अउर गीत गावत हैं। यक ठवर गीत यहि तरह है:

सिउ भोले न जागैं जगाय हारी।
बरम्हा जगावैं , बिस्‌नू जगावैं ,
नारद जगावैं बजाय तारी ॥ सिउ भोले ० ॥
गंगा जगावैं , जमुना जगावैं ,
सरजू जगावैं लहर मारी ॥ सिउ भोले ० ॥
राधा जगावैं , रुकमिन जगावैं ,
गौरा जगावैं हिलाय दाढ़ी ॥ सिउ भोले ० ॥

लोक कै पुजिहर देउता सिउ के यहि तिउहार पै आप सबका हमार सुभकामना !!

जात-जात लोक गायक हीरालाल यादव कै गायी ई सिउ अस्तुति सुना जाय: 

नोट: ई गीत हमैं दीपांकर मिसिर के किरपा से मिला, यहिते दीपांकर का सुक्रिया !

सादर;
अमरेन्दर..

7 responses to “सबका जलचढ़ी ( शिवरात्रि ) केरि सुभकामना ..

  1. …कृपां करिहैं अड़भंगी। जय भोलेनाथ।

  2. जय भोलेबाबा की।
    महारात्रि की शुभकामनाएं।

  3. किरपा करिहैं अड़भंगी, बढि्या भजन सु्नाएं

    महाशिवरात्रि एवं दयानंद बोध दिवस की शुभकामनाएं

    आभार

  4. “हमसे भंगिया ना पिसाई सिव जोगिया”
    बहुतई निक भजन सुनाय बचई
    तोहार बढ़ती होई

  5. शंकर भोले हमरे लोक जीवन के सबसे आदरणीय देव हैंन …औरतन का त सबसे प्रिय -ओनकर आशीर्वाद बिना मिले नारीत्व परिपूरन नहीं होत-ललही छत्थ पर ओनकर वृत्तांत ई औरतें बहुत मन से सुनती सुनाती हैं -और सब औरतन के प्रजननं से जुड़े किस्से हैं और लिंग महातम से जुड़े हैं ….यही नारी जीवन का सबसे बड़ा पुरुषार्थ है भईया …..तब काहें जल चढौनी क लिए बेचारी बिकल न होवे …अड़बंगी गुस्साबौ जल्दिये करतें …बढियां अड्बंगी गीत सुनाह्ये भैया ..मन फरहार हुयी गवा

  6. महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ!

  7. मन हरियर होई ग भाय,वाह.

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