अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर ..

सबका आपन मातरी भू , संसकिरिति अउर मातरी भासा केर सम्मान/बिकास करै क चही , यनहीते खुसियन/थई कै राह निसरत है। 
 ~ रिग बेद 
from a poster in JNU .
आज ‘अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस’ है । यहि दिन पै हम भारत सहित बिस्व की सब भासन की उन्नति केरि कामना करत हन । २१ फरौरी का हर साल ई दिवस मनावा जात है । १७ नवंबर १९९९ का युनिस्को यहिकै मानता दिहिस । जेहिके मूल मा रहा कि बिस्व कै भासा अउर संसकिरिति कै बिबिधता छीजै न पावै । २१ फरौरी चुनै के पीछे खास वजह है । १९४७ का भारत आजाद भवा अउर दुइ हिस्सा भये – भारत अउर पाकिस्तान । पाकिस्तान कै वजूद दुइ हिस्सन मा भा – पुरबी पाकिस्तान अउर पछिमी पाकिस्तान । पुरबी पाकिस्तान मा बांग्ला मादरे-जुबान रही जेहिकै अनदेखी कीन गै । १९४८ से हुवाँ कै लोगै अनकुसाय लागे । १९५२ मा गदर कै सूरत सामने आयी अउर २१ फरौरी का मातरी भासा बरे आन्दोलन करि रहे जुनवस्टी के चार लरिकै सहीद होइ गये । मुदा आगि सान्त नाय भै और १९७१ मा अलग बाँग्ला देस बना । २१ फरौरी हियाँ के ‘भासा आन्दोलन दिवस’ के रूप मा मनावा जात रहै । यहि दिवस का ब्यापक मानता दिहे से बाँग्ला देसी स्वत्व की लड़ाई कै सम्मानउ भा । २००८ का ‘अन्तर्राष्ट्रीय भाषा वर्ष’ घोसित करत ‘संयुक्त राष्ट्र सभा’ यहि दिसा मा आपन जागरुकता देखाइस ।  
    भारत बिबिधता से भरा देस है । यहिकी बिबिधता यहिकी बड़नकई है । भासिक बिबिधता के हिसाब से अस देस बिरलै मिलिहैं । मुला दुख हुअत है ई देख के कि जौनी भासा का आज करोड़न लोग बोलत अहैं , उनकी दसा बहुत नीक नाई है । अवधी , ब्रजी , भोजपुरी , मगही जइसी  कयिउ भासा महत्व नाई पाय सकी हैं । ऐसी स्थिति मा यहि दिवस कै महत्व भारत मा अउरउ बढ़ि गा है ।
   तनी यक नजर यहि यू-टुबहे बीडियो पै डारैं –
                                              

आज बिस्व मातरी भासा दिवस है , यहिकै जानकारी हमैं आज दोस्त रबी यादव सँउकेरेन दिहिन । यहिसे इन्है आभार !

सादर ;
अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी 

12 responses to “अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर ..

  1. वाह बहुत सुंदरा आप की नोट …अनेकानेक भाषाओँ का ये देश ….आपनी भाषाओं को न याद कर पा रहा है उसके पीछे मुझे लगता है की …हमारी मानसिक कमजोरी का ..जबरदस्त सबुत कही कही ….हम आपने पूर्वजों को मुहँ देखने काबिल नहीं की हम ने उनकी विरासत या धरोहर को कहाँ तक बचा कर रखा है कही इस समाज में …और समाज की परिभाषा का प्रयोग करना भी उचित नहीं कही …की समाज कहाँ रहा जब उस के संस्कार ही न रहें है कही …खेर में इस दिन ज्यदा न बोल कर खुद को समेंताना ही उचित समझता हूँ कही …बाकि …भी लोग उड़ाने में कही कमी न रखें कही शायद मुझे भी !!!!!!!!!!!!शुक्रिया सर Nirmal Paneri

  2. बहुत खूब! अच्छा लगा यह पोस्ट देखकर!

  3. वाह . बढ़िया. अवधी के कारण ज्यादा अच्छा लगा.

  4. भइया अमरेन्द्र !
    बहुत बढ़िया जानकारी लोगन लौ पहुंचाएउ हइ …एहिके लिए बहुत बहुत धन्यबाद!
    सब पढियन का आजु केरी बहुत बहुत बधाई!

  5. यहिं मौके पर बड़ी अच्छी पोस्ट लगाये हो अमरेन्द्र भाई -इतना बढियां कोटेशन जौन जौन वीडियो में बाटे ओके तनिक ट्रांसलेटऔ कई द न !

  6. @ अर्विन्द मिश्र जी , विचार था पर निर्णय यह रहा कि १- एक तो अत्यन्त सरल अन्ग्रेजी है , २- कई भाषाओं का आंग्ल अनुवाद यह स्वयं है , ३- कुछ मुहाविरे हैं – कहावतें हैं – कुछ तो सीधे सरल वाक्य सो अनुवाद योग्य एकतारता नहीं !

    परामर्श दिया , इस हेतु आभारी हूँ !

    अवधी अनुवाद देखने की हार्दिक इच्छा हो तो देव यहाँ गौर फरमाएं

    http://www.awadh.info/2010/12/blog-post.html

  7. बढ़िया जानकारी । शानदार पोस्ट।
    अवधी कै अरघान में ई पोस्ट पढ़ि के सबै भाषा-भाषी धन्य होई जैहें..। …जुग-जुग जीया।

  8. फ़ेस्बूक पर आये कमेन्ट :

    Santosh Haswani >>Main samzata hun ki apni bhasha ka prasar barhane ke liye pahle apne bachho ko uske bare main batana bhahie.

    Ashok Kumar Pandey >>हमार मातृभाषा उ जौन हमार आजी और अम्मा बोलेलीं…भोजपुरी…आज के दिन अपनी मातृभाषा और महतारी के परनाम…

    Saurabh Pandey >>आजु कऽ दिन यादगारी रहे.. भइया

    विमलेश त्रिपाठी >>हम आजुओ जवना भाषा में अपना माई-बाबूजी आ गांव के लोगन से बात करेनी..ओह भाषा के परनाम करत बानी…

    Shamshad Elahee Ansari >>aapki khushi mein hamari bhi khushi shamil…

    Keshav Pandey >>Dhanywad Subhkamnao sahit

    जारी ..

  9. Sulekha Pande >>अमर जी , सुन्दर और सार्थक पोस्ट के लिए धन्यवाद ..

    आपको भी अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की शुभकामना ..

    Santosh Kr. Pandey >>रुका भैया ! लागत है की आज तो हम्मे हिया टोक्यो मा कौनो अवधी बोले वाले का हेरे का परे ! तब ले तोहरे सब रहपट के बोले रहा ! जय सरजू मैय्या की !

    Saran Jit Singh Kataria >>wah!!! kya baat hai….

    Rakesh Pathak >>sukiya matirbhasa ke prati aap jaise kuch aur log schne lag jaye to sachmuch bhasha ka kalyan ho jayega ..

    Arun Misra >>माता,महि और मातृभाषा –
    आत्मा ,शरीर और मन के पर्याय हैं ,
    हमारी जड़ें इन्हीं से रस पाती हैं ! जय हो !

  10. बड नीक लागल ई सब पढि कय।

  11. कुछ कमेंट और हैं फ़ेसबुक के :

    Sanjay Yadav Bastariya >> बड़का भाई तोहके परनाम ह …भोजपुरी हमार मातृभाषा ह … हमार अम्मा बोलेलीं भोजपुरी हम ढेर न बोल पाई ले पर …समझ ले ली …आज के दिन अपनी मातृभाषा और महतारी के परनाम

    Anjule Elujna >> आज के दिन अपनी भाषा को मेरा नमन…

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