बसन्त राजा फ़ूलइ तोरी फ़ुलवारी

आजु बसंत पंचमी है। मौका बढिया है यहु गीत सुनवावा जाये। यहिका लिखिन औ गाइन हैं सीतापुर मां रहै वाले गीतकार लवकुश दीक्षित। लवकुश दीक्षित अवधी के बिख्यात कवि स्व.बलभद्र प्रसाद दीक्षित’पढ़ीस’ के पुत्र हैं। उनक्यार एक गीत टुकुर-टुकुर देवरा निहारै बेईमनवाबहुतै प्रसिद्ध है।चलौ आप यहु बसन्तगीत सुनौ। लवकुश दीक्षित जी की खुद केर आवाज मां। जिनके नेट मां गड़बड़ी है उनके खातिर लिये यहु गीत लिखि के लगावा जा रहा है।

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बसंत

बसन्त राजा फ़ूलइ तोरी फ़ुलवारी
बसन्त राजा फ़ूलइ तोरी फ़ुलवारी

मह-मह महकइ खेतवा कि माटी महकइ कियारी कियारी
बसन्त राजा फ़ूलइ तोरी फ़ुलवारी!

गदराने गोंहुंआ सरसों ठाढी ठुमकै
फ़ूली कुसुमियां पियर रंग दमकै
हरी हरी मटरी की पहरी घेघरिया
अरसी का गोटा किनारी!

बसन्त राजा फ़ूलइ तोरी फ़ुलवारी!

महुआरी महकैं अमंवा बौराने
बेर पके कचनार फ़ुलाने
बेला,चमेली औ फ़ूलइ चंदनियां
लहरै उजरी कारी!

बसन्त राजा फ़ूलइ तोरी फ़ुलवारी!

मदमाते भौंरा कली का मुंह चूमैं
रंग रंगी तितली पराग पी झूमैं
लपटी बेलि गरे बेरवा के
बप्पा की बिटिया दुलारी!

बसन्त राजा फ़ूलइ तोरी फ़ुलवारी!

बिखरी परी बसन्त की माया
बहकैं मन औ बहकैं काया
ज्ञानी गुनी बसन्त मां बहकैं
बहकैं सन्त पुजारी।

बसन्त राजा फ़ूलइ तोरी फ़ुलवारी!

फ़ाग धमार कबीरैं गावैं
ढोल झांझ करताल बजावैं
गाल गुलाल भाल बिच रोरी
होरी खेलैं बनवारी।

बसन्त राजा फ़ूलइ तोरी फ़ुलवारी!

हरि गोपी संग किशन कन्हैया
निरखैं ग्वाल पुकारैं गैया
अन्तर्यामी जसुदा के छैया
कवि लवकुश बलिहारी।

बसन्त राजा फ़ूलइ तोरी फ़ुलवारी!

-लवकुश दीक्षित

 

10 responses to “बसन्त राजा फ़ूलइ तोरी फ़ुलवारी

  1. basant ki shubhkaamnaen … sundar geet .

  2. बहुतै बढ़िया गीत, मौका मुताबिक़, गलौ बहुत सधा भवा है लवकुस जी केरा….आनंद आय गवा…
    अनूप जी, और लवकुस जी का बहुत बहुत सुभकामना बसंतपंचमी केरी….और धन्यवाद यहु गीत हियाँ प्रस्तुत करइ बद …

  3. बहुतै सुन्नर गीत…अऊर पीछे से तोहार वाह-वाह बहुतै ग़ज़ब…अईसन देसज बिम्बन के खाली उहे ला सकेला जे सही में सरसों के खेतन अऊर गेंहू क बालन संघे रहल होय्। होरी क सनेसा मिल गईल…

  4. सुनते हैं जी गीत।

  5. aapkee yah rachanasant ko man main utaar detee hai. badhaee sweekaren.

  6. “बसन्त राजा फ़ूलइ तोरी फ़ुलवारी!”- आपकी यह रचना बसंत को मन में उतार देती है. बधाई -अवनीश सिंह चौहान

  7. बसन्त पर बहुत नीक गीत लिखेओ । आप का हमरी तरफ से बहुत शुभकामना ।
    आपकै ब्लाग कै फुलवारी भी यही ताय गीतन से हम सबका मन प्रसन्न करत रहै ।

  8. ऐसन गीत सुनाये भैय्या की अब मन मान गए की बसंत के रस बरसे लगा. जिव खुश हुई गय..सज्जो बाग बगीचा कुल एके साथे घुमाव दिहोय. बनल रहो भैय्या ….

  9. शुक्रिया अनूप जी , यहि गीत का जब पहिली बार सुने रहेन आपकी पोस्ट पै तब इच्छा भै रही कि ई यहि अवधी ब्लॉग पै आय जाय , आपके परयास से अस संभव होय सका यहिते आभारी अहन आपकै ! लोगै ई गीत सराहिन यहू ते आनंद आवा !!

  10. अवधी के आँगन में बसन्त की किलकारी…वाह !
    अनूप जी के ब्लॉग पर ही इस गीत को सुन/पढ़कर आनन्द-विभोर हुए थे हम तो ! अब यहाँ भी इसको पुनः सुना/पढ़ा !
    आभार !

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