आप सबका होली कै ढ़ेरन सुभकामना … होली खेलैं रघुबीरा अवध मा …

                                                                                      
पढ़ैयन का राम राम !!!
‘ अवधी कै अरघान ‘ की महफ़िल मा आप सबकै स्वागत अहै ..
—————– आप सबका होली कै ढ़ेरन सुभकामना ———————- 
                                                                                   
भैया !
जब पुरोहिताई के चन्दन पै सामाजिक-समरसता कै अबीर चढ़ जाय , हलकोर के मल दियय इंसान इंसान का , राम अउर रहीम यक्कै ठाँव बैठि के गोझिया दाबैं , परिवार कै माहौल कुछ अस बनै कि ” फागुन मा बाबा देवर लागैं ” , प्रेम कै ई चरम जब औतरैतब समझौ कि ” होली ” हाजिर है ! 

आज अवध के इलाके मा होली के परकार का बरना चाहित है , वैसे तौ तमाम परकार हैं यहिकै , पर मुख्य रूप से तीन रूप पै ध्यान रखत आगे बढ़ब … यै तीन परकार यहि तरह हैं —- 
१) लखनऊ कै होली .
२) बैसवाड़े कै होली .
३)  अजुध्या कै होली .
……… अब तीनिउ पै थोरा ठहर के बतुवाब ..

(१) लखनऊ कै होली —

” किसोरी संग होली खेलत नंदकिसोर ” – जैसे होली गीत का सुनि के अवध कै नबाब वाजिदअली साह अपने गले कै जंजीर उतार के पुरस्कार के रूप मा दै दिहे रहे ! .. नबाबी – किस्सन से भरी है लखनऊ कै होली .. गंगा – जमुनी संस्कृति के क्रोड मा बसे लखनऊ मा उड़त होली कै अबीर अमीर गरीब कै भेद नाय करत .. सुबह ६-७ बजे से होलिहारन कै टोली निकरि परत है ..लोगै यक-दुसरे का रंग से सराबोर कै दियत हैं .. संकर भोले कै बूटी छनत है … नसे मा झूमत , यक दुसरे का धकियावत , मौजत,अनाफ-सनाफ बकत , लुंठ लुंठ लुन्ठात लोगन कै कारवां देखा जाय सकत है .. दुपहर २ बजे के बाद सभै बन – थान के , इतर-फुलेल मारि के निकरि परत है होली मिलय .. अमीनाबाद पार्क कै होली मिलनोत्सव अपने आप मा अद्भुत रहत है .. सब धरम सम्प्रदाय जाति आपस मा मिलत हैं … 
        लखनऊ कै फगुहार धमार – फाग गावत हैं .. ई फाग हियाँ बहुत गावा जात है ;

” सुदामा , कान्हां भेटन आये , सुदामा कान्हां भेटन आये |
जबहिं सुदामा ग्वैड़े आये , फूल लई समुहे खाये | सुदामा ………….
जबहिं  सुदामा भीतरे आये , भरि-भरि अंग लगाये | सुदामा ………….
जबहिं सुदामा अंगना आये , रूचि-रूचि भोज कराये | सुदामा …………. 
सुदामा , कान्हां भेटन आये , सुदामा कान्हां भेटन आये | |  ” 

(२) बैसवाड़े कै होली — 

बैसवाड़ा अवध कै सान है .. हियाँ कै जिन्दादिली होली का परवान चढ़ाय दियत है .. बसन के दिनन से ही चौपालन मा फाग सुरु होइ जात है , ताक धिना धिन – ताक धिना धिन , निराला फाग जारी रहत है .. बैसवाड़े कै ” बारागाँव ” कै होली तौ बहुत दूर – दूर तक जानी जात है .. बैसवाड़े कै औरतैं बड़ी निर्भीक होलिहार होति हैं , इनकै हंसी – मजाक , ठेलियाब , ऊधम , जिन्दादिली , सब जगहीं सर चढ़ी के बोलत है , मर्द का कै पाए इनकै मुकाबला .. बूढ़ा माई नए फैसन की बिटियन से कहति हैं —” सिखि लियव होली कै गौनई , नहीं तौ हमरे साथ सब चली जाई ! तब का सरग मा अइहौ हमसे सिखय ? / ! ” … मुल के सिखे ! ई सब .. सब तौ अंगरेजी गानन कै दिवानी हुवत जाति है .. 
भला कुछ मेहररुवन का याद है , ई गीत , गनीमत है ;

” गड़ि गे बसंत के ढाह बिना होली तापे न जाबै |
पहिली अनउनी ससुर मोर आये ,
ससुरा लौटि घर जाव , बिना होली तापे न जाबै |
दुसरी अनउनी जेठ मोर आये ,
जेठा लौटि घर जाव , बिना होली तापे न जाबै |
तीसरी अनउनी देवर मोर आये ,
देवरा लौटि घर जाव , बिना होली तापे न जाबै |
 गड़ि गे बसंत के ढाह बिना होली तापे न जाबै | | ” 

(३) अजुध्या कै होली — 

अजुध्या के कौनौ परोजन का हियाँ के मंदिरन से काटि के नाय देखा जाय सकत .. पांच हजार से ढेर  मंदिर हैं हियाँ , ऐसा लोगई बतावत हैं .. होली के समय पै मंदिर के भगवान भला कैसे होली न खेलिहैं ! .. भगवान के ओढर से सब मनई खूब होली खेलत हैं .. लोगई दूर दूर से इहाँ कै होली देखै आवत हैं .. इहाँ कै फाग कै ई गाना तौ सबके दिलो- दिमाग पै चढ़ा रहत है ;

” अवध मा होली खेलैं रघुबीरा , अवध मा होली खेलैं रघुबीरा |
केहि के हाथे कनक पिचकारी , केहि के हाथ अबीरा ,
राम जी के हाथे कनक पिचकारी , लछमन हाथे अबीरा | .. अवध मा होली खेलैं ….. 
केहि के हाथे झांझ ढप सोहै , केहि के हाथे मँजीरा ,
राम जी के हाथे झांझ ढप सोहै , लछमन हाथे मँजीरा | ..  अवध मा होली खेलैं ……
अवध मा होली खेलैं रघुबीरा , अवध मा होली खेलैं रघुबीरा || ‘
.
वैसे तौ बिस्तार से बहुत कुछ लिखा जाय सकत है मुला आज एतने बन पावा है , अब यहि गीत कै मजा लीन जाय जिहमा होली कै उत्साह रंग के तरीके से चढ़ा बाय ! 
                                                                             

आप सबका होली कै खूब सुभकामना !!!!!!
राम राम !!!!!!!!!!!! 

[चित्र : साभार गूगल से]

16 responses to “आप सबका होली कै ढ़ेरन सुभकामना … होली खेलैं रघुबीरा अवध मा …

  1. बेजोड़ पोस्ट है ये आपकी त्रिपाठी जी…वाह…आनंद आ गया… आप को भी होली की शुभकामनाएं…
    नीरज

  2. जब कोई बात बिगड़ जाए
    जब कोई मुश्किल पद जाए तो
    तो होठ घुमा सिटी बजा सिटी बजा के
    बोल भैया “आल इज वेल”
    हेपी होली .
    जीवन में खुशिया लाती है होली
    दिल से दिल मिलाती है होली
    ♥ ♥ ♥ ♥
    आभार/ मगल भावनाऐ

    महावीर

    हे! प्रभु यह तेरापन्थ
    मुम्बई-टाईगर

    ब्लॉग चर्चा मुन्ना भाई की
    द फोटू गैलेरी
    महाप्रेम
    माई ब्लोग
    SELECTION & COLLECTION

  3. बहुत बढ़िया प्रस्तुति …. होली की हार्दिक शुभकामनाये .

  4. वाह…आनंद आ गया…
    होली की शुभकामनाएं…

  5. Amar ji,

    Kal Holi hai yeh bhi yaad nahi thaa. Aisee jagah hain, jahan pata hi nahi chalta ki Holi- Diwali kab aayee gayee. Aapka blog dekhkar/padhkar , mera ghar aur mera mann, Holi ke indra-dhanushi rang se bhar gaya.

    Aapko abir aur gulaal ke saath “Holi' ki dheron shubhkaamnayein. Ye Holi ka tyohaar aapke aur aapke parivaar ko rango aur khushiyo se bhar de !

    Lucknow ki Holi padhkar ghar ki yaad aa gayee.
    'Gujhiya' bhi yaad aa rahi hai.

    Amar ji, humesha ki tarah, bahut sundar post hai. Badhaai !

    Wish you all a very happy holi !

  6. वाह, अमरेन्द्र भैय्या. खूब बनी आपकी ये पोस्ट. मैं रही हूँ बैसवारी क्षेत्र में. पूरे आठ दिन तक होली चलती थी हमारे उन्नाव और कानपुर में. आते-जाते लोगों को रंगों से भरे ड्रम में डुबो दिया जाता था. अष्टमी के दिन से रंग खेलना बंद किया जाता था. पुराने दिन याद आ गये.

  7. वाह अलग अलग स्थानो की होली देखकर मज़ा आ गया । आपको भी शुभकामनायें ।

  8. अवधी के सजग पहरुआ हो भइया !
    जुड़ा गये भाई लिखाई से !
    “सिखि लियव होली कै गौनई , नहीं तौ हमरे साथ सब चली जाई ! तब का सरग मा अइहौ हमसे सिखय ?” बात सिसकाय गई भीतर से ! का कुल लीक परिपाटी/परम्परा अइसहीं बिलाइ जइहैं !

    अमरेन्दर हौं ई ब्लॉग-जगत में, संतोष है कछु ! होली कै इ चार परकार हरषाय गये !
    होली कै शुभकामना !

  9. गुलज़ार खिले हों परियों के,
    और मजलिस की तैय्यारी हो,
    कपड़ों पे रंग के छीटों से,
    खुशरंग अजब गुलकारी हो.

    होली की अशेष एवं अनंत शुभकामनाएं!

    “अब चलित हईं होरी खेले”

  10. अमरेन्द्र जी
    अवध की होली के तीनों रूपों को क्या ही बेहतरीन तरीके से पेश किया है………..होली पर इस बार ब्लोगर्स की सक्रियता कुछ कम रही है……………….ऐसे में आपकी पोस्ट ने अवधी होली को संझने में अवधी -इंसैक्लोपीदिया का का काम किया है. रंगों के मौसम की बधाई.

  11. जय हो!सुन्दर रंग-रंगीली पोस्ट! आनन्द आ गया ,जी जुड़ा गया।

  12. ब्लॉग पर पहली बार आया..अच्छा लगा…होली पर आपने लोक रंग और लोक प्रचलन की बात छेदी जो जानकारी के तौर पर बहुत महत्वपूर्ण है..खासकर यदि हम कहें कि लोक संस्कृति भारत की आत्मा है….पोस्ट की भाषा से बहुत धीरे धीरे जुड़ पाया जिसका मुझे खेद है..मगर मुझे अच्छा लगा कि लोक रंग लोक संस्कृति पर इस क्षेत्र में भी बहुत काम हो रहा है. आपका हार्दिक धन्यवाद..!

    निशांत कौशिक

    http://www.taaham.blogspot.com

  13. कुछ नवा लियावा भाय ,कैसे हैं,कुछ नवा नहीं लिखत है का.

  14. बहुत देर से आये…
    होली खेलन में तोहे भुलाई गए…!

    जब हम पढ़त रहे त परीक्षा में एक प्रश्न आवत रहा …'सारांश लिखो'…
    आपहु सारांश लिख दिए हो १.२.३. होली पर्व का …

    साँची कहे…में होली खेले रघुवीरा..
    ..बधाई.

  15. bhaiya tumhar blog dekhi ke maja aai gawa.
    rashmisheel
    rashmisheel.shukla@gmail.com

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