कौवा-बगुला संबाद , भाग- ३ : अकिल कै खजाना …

 [पढ़ैयन का राम राम !!!
आज कै भाग इंसानन की अकिल पै अहै …]


कौवा-बगुला संबाद , भाग- ३ : अकिल कै खजाना …
(दुइनिव टेक्टर-टाली के पीछे जात अहैं | टेक्टर गांव से पक्की सड़क 
के बीच के कच्चे रस्ते का रौंदत जात अहै | खूब धूरि उड़ति अहै |

बड़ा सफेदहूँ माहौल देखि के बगुला कौवा पै जड़ब चालू किहिस ...)

बगुला : ( उड़त उड़त कौवा का तिर्यक देखि के ) यार ! अब तौ तू अतना धूरि से 
लथपथ अउर सफ़ेद ह्वै चुका हौ कि चाहे जेहका धोखा दै सकत हौ …कहौ तौ 
चली ताले के लगे …मछरी मारै सिखाय दी …
कौवा : ( मटमैली पलक उठाय के अउर यक आँख से तरेर के ) अबे ! सरम 
नहीं आवत तुँहका …थोरी देरि पाहिले हम ग़मगीन रहेन अउर जैसे थोरि 
के उबरेन वैसे तू धोखा कै पाठ पढ़ावै चालू किहेव …
बगुला :…..अइसा है कि बगल के पुरवा मा सत्तनरायन कै कथा कुछ पागल 
सुनत अहैं , वहीँ जाव अउर अपने आत्मा का सांती पहुचाओ . लेकिन यक 
सच्चाई हम जनित है अच्छी तरह से कि तू जब-जब इंसानन की दुनिया 
मा गयौ है तब तब संताप लैके लौटेव है | बुरा न मानौ तौ पूछा चाहित हन  
कि इंसानन से ई तोहार बिसेस लगाव काहे अहै … जबकि …
 
”मुंह जारे बिल्लिउ सदा ,
छाछ पियत है फूंकि के |
तू एतना उल्लू अहौ ! ,
सुधरेउ नाहीं चूकि के || ”…


कौवा : ओ भैया ! हम बिसेस लगाव बतायिव दियब तू तब्बौ न समझ पउबो |
मुला पूंछे हौ तौ बताय दियत अहन, नाहीं तौ कहबो कि हम बुरा मानि गयेन …
जब ब्रह्मा इंसानन का बनाइन तब जाने काहे बड़ा खुसी ह्वै गये | मारे 
खुसी के दिमाग जैसी चीजि इंसानन के हवाले कै दिहिन अउर कहिन कि 
यकरी सहायता से तुहैं जियै मा कौनिव दिक्कत न होये | फिर हमरे तरफ देखि के 
कहिन कि ई जीव तोहार सहायता करे | जब तक जीबो तब तक तोहार सनेस 
जथासंभव पहुंचाये अउर जब मरि जाबो तौ पितरपख मा तोहरी तृप्ती कै  
माध्यम बने | हम सर झुकाय के ब्रह्मा जी कै बात स्वीकार कै लिहेन | हमै 
लाग कि धरती पै सेर , भालू , सांप , मगर , बिसखोपड़ी जैसे खतरनाक 
जीवन के बीचे ई निरीह जीव बिना दिमाग के न  रहि पाये | ब्रह्मा जी बड़ा 
नीक किहिन… लेकिन …तब से आज तक जौन देखेन , वहिपै तौ यही सच 
लागत है … …
 
” बिधाता नवाजिन अकिल कै खजाना ,
तू दुनिया मा कोहराम काहे मचायौ ?
मिली जवन ताकत है रच्छा के खातिर ,
तू वाहिका विनासन कै जरिया बनायौ ! ”
 
अस नाय न कि इन्सान अकिल कै दुरुपयोगै करत आवा | 
कइव नीकौ कदम उठाइस | सभ्यता कै विकास किहिस | ख़राब चीज तौ ई किहिस
कि अपने का निर्दुन्द बनाय डारिस | ई समझ लिहिस कि दुनिया मा ‘मछरी-न्याय’ 
सबसे बड़ा सच अहै | यानी जादा ताकतवर कम ताकत वाले का हबक लियै | ऐसा 
नाय न कि औरे जीव यहिके सिकार बने , ई अपने संगी-साथी का भी मौका पाय के
चाटि गवा | ई बाति अभिधा अउर ब्यंजना दुइनिव मा सही अहै | अबहीं कुछ समय 
पाहिले घटा नोयडा कै ‘पंधेर’ वाला मामिला देखि सकत हौ | जाने केतना पंधेरन 
का हम अउर तू अपनी दिब्य आँखिन से  जानित है , जिनका इन्सान कै अकिल 
नाहीं जानि पावत | पंधेर का जब इंसानी अकिल भूलि गै तौ हमहूँ का लाग कि 
वाकही इंसानी अकिल बड़ी ताकतवर है ( ! ) …
अब हम का करी …हम तौ बचन-बद्ध अहन …यहीलिये 
हम इन्सान के बारे मा सोचित है …
बगुला : एतना जादा न सोचा करौ…कम सोचौ…जहाँ जवन मिलै भकोसौ अउर 
जियौ मजे से …इहै इन्सान करत अहै अउर मौका मिलत है तौ हमहूँ करित है …
हम सबका आपन बाति सिरफ मजा लियै खातिर करै का चाही …ठीक संसद 
मा जैसे नेता करत हैं …अब आगे देखौ टेक्टर नये थाना की सीमा मा प्रबेस 
करत अहै …सामने पुलिस इन्द्र के बज्र के नाईं डंडा उठाये वाहिका रोकावत 
अहै …चलौ नवा एपीसोड सुरु हुवै वाला अहै …
कौवा : चलौ …का कही …


( दुइनिव लपक के पास के पेड़ पै 
बैठि के माहौल ताड़ै लागे …)

[ आज एतनै , अब अगिले अत्तवार का
तब तक राम राम !!! ]
                                                        

छबी-स्रोत ; गूगल बाबा























7 responses to “कौवा-बगुला संबाद , भाग- ३ : अकिल कै खजाना …

  1. यी खगन क बतकही बड़ी नीमन चलत बा हो –
    का यी दूनौ गावईं में रही जहियें कि कभौं शहरौ क रुख करिहैं ?

  2. संतों भाई !
    दुइनिव पच्छी सिरफ गाँवैं मा न रहिहैं …
    औरउ जगह जैहैं मुला कल्ले-कल्ले …

  3. नए टमपलेट क फिर से बधाई..;);).,.,.,.,.,.,.,}::}….

  4. बहुते बढ़िया मजा आ गया ।

  5. बहुते बढ़िया सरकार! म़जा आई गवा !

  6. जमाये रहो बन्धु – कागभुशुण्डि और गरुड़ संवाद का मजा मिल रहा है – वह भी अवधी मे। तुलसी बाबा कतऊं से देखत होईहीं!

  7. कौवा-बगुला केतना सयान बाटे भैया..मानेक परी..

    मुझे एक संतुष्टि सी मिलती है..जब आपका लिखा कुछ भी पढ़ता हूँ. आश्वस्त रहता हूँ कि कुछ उम्दा मिलेगा, कुछ नया मिलेगा, शिल्प संतुष्ट होके नया सौन्दर्य गढ़ता मिलेगा..और बात निकलके दूर तलक जायेगी और जमीनी सरोकार सहेजा मिलेगा…!

    बेहतरीन चल रही है ये धारावाहिकी..क्षमा करियेगा ठीक-ठाक विलम्ब से आया हूँ..!

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